Wednesday, August 3, 2011

शायद किसी जन्म में हम मिले थे कभी

मन कभी बिल्कुल आवारा सा बन न जाने कहाँ कहाँ से घूम कर आता है।कभी तुम्हारे साथ का पहला दिन याद करता है तो कभी उस एहसास को खोजने निकल पड़ता है जिसमें तुमसे मिलन के हर एक क्षण का लेखा जोखा अब भी वैसे ही यादों के पन्नों पे ज्यों का त्यों लिखा हुआ है।धीरे धीरे सम्मोहीत होता जाता है ये मन तुम्हारी मनगठंत कल्पनाओं में कही खोकर।पर जब हाथ बढ़ाकर छुता है तुमको तब कुछ नहीं होता है उसके पास सिवाय तुम्हारी यादों के।ये पूरी जिन्दगी क्या यह तो सात जन्म भी यूँही गुजार देगा बस तुम्हारी यादों के संग।पता नहीं कैसा मनभावन आईना है यह तुम्हारी यादों का जिसमें वो खुद को हर बार देखकर एक नयी ताजगी और उमंग के संग प्रफुल्लित हो उठता है।शायद बीते दिनों में स्वयं के बौनेपन को देख आज का यह विशाल मन अहंकारवश हँस पड़ता है।पर उसी हँसी में छुपी होती है एक ऐसी उदासी जो बस स्वयं ही देख पाता है वो और बेचैन होने लगता है।
आकर्षण के चरमोत्कर्ष पर हमारा प्यार मिला था कभी।जिसका आधार बस मै था और तुम थी।तुम वो थी जो अक्सर मेरी कल्पनाओं में किसी धुँधली तस्वीर सी आ जाती और मुझसे पूछती "शायद किसी जन्म में हम मिले थे कभी।" पर मै कुछ पल बिल्कुल शांत रहता।क्योंकि अब तक ना मुझे स्वप्न पर विश्वास था और ना ही जन्म जन्मांतर के अटूट रिश्तों की समझ।अब तक तो बस प्यार की परिभाषा मेरे लिये कुछ वैसी थी जहाँ बस आनंद का आगमन था विरह या संताप ना था।क्योंकि अभी अभी तो आया था मै प्यार के इस अनूठे खेल में शामिल होने।शायद अभी बहुत से नियम और शर्तों को मै नहीं जानता था।अभी बहुत ही कच्चा था मै,परिपक्वता आनी बाकी थी।
हर रात एक अनोखे एहसास को तकिये से दबा कर सो जाता उसपर और फिर वैसे ही तुम्हारी धुँधली सी छाया मेरे सामने आ जाती और पूछने लगती "शायद किसी जन्म में हम मिले थे कभी।" पर मुझे कहा याद था कोई जन्म पुराना।मेरी यादाश्त तो इतनी कमजोर थी कि रात का देखा हुआ ख्वाब भी भूल जाता मै सुबह तक।ऐसे में पिछला जन्म याद करना जरा मुश्किल था।यूँही जीवन में कई विचारों और भावनाओं से गुजरता हुआ एक दिन मिल गया तुमसे।याद है तुम बस स्टाप पे अकेली खड़ी बस के आने का इंतजार कर रही थी और मै तुमसे बिल्कुल अपरिचीत होते हुये भी चुपचाप तुम्हें निहारे जा रहा था।शायद कोई अदृश्य सा बंधन खीँच रहा था मुझे तुम्हारी ओर।एक पल हवा के झोंकों से तुम्हारी जुल्फ तुम्हारे चेहरे को ढ़ँकने लगी।मन हुआ की दौड़ कर जाऊँ और उन्हें सँवार दूँ।पता नहीं किस अधिकार से ऐसा करने को सोच रहा था मै।पर अगले ही क्षण एहसास हुआ तुमसे परायेपन का।
अब मुझमें एक नयी भावना का जन्म हुआ जो शायद इंतजार था।घंटों बस स्टाप पर करता रहता तुम्हारे आने का इंतजार और जब तुम आती तो यूँही निहारता रहता और तुम्हारे जाने तक एकटक देखता रहता तुमको पर कुछ नहीं कह पाता।शायद मै भूल गया था अपना कोई बिता कल पर इन नजरों को शायद अब भी याद थी वो सारी गुजरी हुई अपनी कहानी।शायद सच में तुमसे किसी जन्म का नाता था मेरा।वरना यूँही लाखों की भीड़ में क्यों तुमपे ही आकर निगाहें अटक जाती।एक रोज जब टूट गया मेरी अधीरता का बाँध तो मैने पूछा तुमसे "क्या तुम मुझे जानती हो" और तुम बड़े ही परीचित से लगे इस दिल को उस अपनी एक हँसी के साथ।उस रोज पहली बार तुम्हारे साथ बस पर बैठा मै तुम्हारी मँजिल तक गया और ऐसा लगा कि कभी की कोई अधूरी प्यास थी दबी जिसे दो बूँद नसीब हो गया हो।तुम्हारी हर अदा बोलने की,देखने की और सोचने की।न जाने क्यों कुछ जाना पहचाना सा लगा।ऐसा लगता कि कभी तुमसे मिल चुका हूँ मै पहले और अब तो मेरे ख्यालों में आने वाली वो तस्वीर भी कुछ साफ साफ सी दिखने लगी।और अब समझ आने लगा मुझे वह प्रश्न "शायद किसी जन्म में हम मिले थे कभी।"
आज सूने मन के आँगन की दहलीज पर बैठा मै सोच रहा हूँ कि क्या सच में किसी जन्म में हम मिले थे तुमसे।आज जब तुम मेरी नहीं हो।किसी गैर की हो और अब शायद तुम भूल भी गयी होगी मुझे।पर उस प्रश्न की सार्थकता आज भी है कि "शायद किसी जन्म में हम मिले थे कभी।" तब तुम सिर्फ मेरी थी और तुम पर मेरा पूरा अधिकार था।पर न जाने क्यों आज तुम मेरी नहीं हो।हो ना हो पर जरुर अपने वादे में खोट हुई होगी जब हम सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा किये होंगे।पर बहुत कम दिन की जानपहचान में भी ऐसा लगता था मुझे की तुम मेरी कोई पूर्वपरीचित हो।मेरे रुह की तमन्ना भी कुछ सुकुन सा पा लेती जब कर लेती आत्मसात उस एहसास को खुद में जिसमें तुम मेरे साथ हो हर पल।मै आज फिर इंतजार कर रहा हूँ किसी नये जन्म का और इस बार मिलना तो यूँ ना मिलना जैसे मिली हो इस बार।इस बार सारे बंधनों को तोड़कर तुम बस मेरी "तुम" बन कर आना और "मै" तो हमेशा से तुम्हारा हूँ  और रहूँगा।शायद इस वजह से कि किसी जन्म में हम मिले थे कभी।  

10 comments:

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

बहुत सुन्दर सर्जना...प्रेम की अभिव्यक्ति इन शब्दों में ..शायद किसी जन्म में हम मिले थे ... बहुत सुन्दर लिखा है... भाषा भी बड़ी काव्यात्मक लगी ..बड़ी सुन्दर ... स्नेह सहित ..

sushmaa kumarri said...

बहुत सुंदर सर्जन...

Anonymous said...

ek dard hai..kuchh savaal hai...


http://teri-galatfahmi.blogspot.com/

Dinesh pareek said...

मैने आपका ब्लॉग देखा बड़ा ही सुन्दर लगा बसु अफ़सोस यही है की मैं पहले क्यों नहीं आ पाया आपके ब्लॉग पे
कभी आपको फुर्सत मिले तो आप मेरे ब्लॉग पे जरुर पधारे
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दिनेश पारीक

रजनीश तिवारी said...

प्रेम भावपूर्ण सुंदर लेख ...

सागर said...

prabhaabhavpurn rachna....

vandan gupta said...

प्रेम की बहुत ही प्यारी अभिव्यक्ति।

Neelkamal Vaishnaw said...

सुन्दर और सटीक व्याख्या
बधाई आपको

दर्शन कौर धनोय said...

bahut sunder likha hei ...aesa laga maano saamne hi ho raha hei .....

Shivam Mishra said...

Nice Post:- 👉Arishfa Khan Whatsapp Number